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गाय सरकारी , गौशाला प्राइवेट

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हमारे देश मे गाय को माता का स्थान दिया गया है | सभी तीज त्योहारो मे अनुमन हर दिन भी हर परिवार मे अपने खाना खाने से पहले गाय माता की रोटी निकाली जाती है | और अब तो ये राष्ट्रीय पशु भी घोषित होने की कगार पर है | लेकिन इतनी मान्यता होने के बावजूद भी गाय पर राजनीति तो बहुत होती है ,लेकिन गौसला मे भारी संख्या मे पल रही गाय को किसी प्रकार की सहायता नहीं दी जाती है | स्थानीय लोगो की मदद से ये गौसला चल रही है या गाय खुद अपना खर्चा दुध देकर वहन कर रही है | कोई देखने वाला ही नहीं रहा , केंद्र–सरकार हो या राज्य सरकार गायो पर राजनीति तो कर लेंगे लेकिन इनकी तरफ ध्यान देने के लिए कोई कदम नहीं उठाना चाहते | अभी हाल ही मे माननीय प्रधानमंत्री ने गौशक्षको पर बयान दिया की 80 प्रतिशत गौरक्षक गुंडागर्दी के बजाया कुछ भी नहीं करते गौरक्षक के नाम पर बड़े-2 बयान दिये जाते है | गाय माता को गौरक्षको की जरूरत ही क्यो पड़ी जो लोग गौरक्षको का झोला ओढ़कर इस तरह गुंडागर्दी करते है | सड़क पर कोई गाय को ले जाता तो धुनाई कर डालते है क्यो धुनाई कि भाई इनकी गाय को कटान के लिए ले जा रहे है | भले ही वो किसी और काम ले जा रहे हो सुर्ख़ियो मे आने के लिए ये जरूर करेंगे लेकिन गौशाला मे उचित सहायता ना मिल पाने के कारण गायो को विभिन प्रकार से नुकसान होते है | तो हुए उस पर ध्यान नहीं क्यो वहाँ से क्या ये लोग सुर्ख़ियो मे आएंगे , काम तो काम के तरीके से होगा ना खाली ढ़ोल बजाने से कुछ होने वाला नहीं है | गाय हमारी माता है | तो इसकी माता की तरह से ही हिफाजत करनी पड़ेगी वरना वो दिन दुर नहीं जब आप इनके लिए आँसू बहायेगे

Web Title : गाय सरकारी , गौशाला प्राइवेट

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